वृन्दावन वैष्णव
वृन्दावन
श्री कृष्ण का आँगन
उन लोगों के लिए, जो वृन्दावन को केवल एक स्थान नहीं मानते।
एक धाम। एक भाव। अनन्त कथाएँ।
वृन्दावन को समझने के लिए शायद उसे समझाने से ज़्यादा, उसके साथ थोड़ा समय बिताना पड़ता है। उसके मन्दिरों में, उसकी गलियों में, उसकी कथाओं में — और उस वृन्दावन में भी जो आज हमारे सामने है।
पाँच दिशाएँ
वृन्दावन की ओर
देखने के पाँच ढंग।
आज की कथा
कुछ कथाएँ
सुनी नहीं जातीं।
वे धीरे-धीरे हमारे भीतर अपना स्थान बनाती हैं। वृन्दावन की कथाएँ भी कुछ ऐसी ही हैं — पुरानी, जीवित और हर बार थोड़ी अलग दिखाई देने वाली।
विशेष
कार्तिक मास
कार्तिक यहाँ किसी कैलेंडर की एक तारीख नहीं। यह वृन्दावन के साथ रहने, देखने और स्मरण करने का एक अपना ही समय है। इस मास में लौटने वाली कथाओं, परम्पराओं और अनुभवों को हम यहाँ धीरे-धीरे संजोएँगे।